स्वराज पार्टी का गठन (1923)
किसने स्वराज पार्टी निर्माण करने के लिए कांग्रेस के अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दिया था - सी.आर.दास U.P.P.C.S. (Spl) (Pre) 2004
- 1919 के भारतीय शासन अधिनियम द्वारा स्थापित केंद्रीय तथा प्रांतीय विधान मंडलों का कांग्रेस ने गांधीजी के निर्देशानुसार बहिष्कार किया था, और 1920 के चुनावों में भाग नहीं लिया।
- असहयोग आंदोलन की समाप्ति और गांधीजी की गिरफ्तारी के बाद देश के वातावरण में एक अजीब निराशा का माहौल बन गया था।
- ऐसी स्थिति में मोतीलाल नेहरु तथा सी.आर.दास ने एक नई विचारधारा को जन्म दिया।
- मोतीलाल नेहरु तथा सी.आर.दास ने कांग्रेस को विधानमंडलों के भीतर प्रवेश कर अंदर से लड़ाई लड़ने का विचार प्रस्तुत किया तथा 1923 के चुनावों के माध्यम से विधानमंडल में पहुँचने की योजना बनाई।
- लेकिन 1922 में कांग्रेस के गया अधिवेशन में बहुमत के साथ इस योजना को अस्वीकार कर दिया गया।
- सी.आर.दास (इस दौरान वे कांग्रेस के अध्यक्ष थे) ने कांग्रेस की अध्यक्षता से त्यागपत्र दे दिया और मार्च, 1923 में मोतीलाल नेहरु के साथ मिलकर स्वराज पार्टी की स्थापना की।
- इस पार्टी का मुख्य उद्देश्य चुनावों के माध्यम से कांउसिलों में प्रवेश कर तथा उन्हें काम न करने देकर 1919 के भारत शासन अधिनियम का उच्छेदन करना था।
स्वराज पार्टी को संस्थापित किया था - सी.आर.दास तथा मोतीलाल नेहरु ने U.P. Lower Sub. (Pre) 1998
स्वराज पार्टी का गठन..... असफलता के बाद हुआ - असहयोग आंदोलन B.P.S.C. (Pre) 1999
- असहयोग आंदोलन की असफलता के बाद स्वराज पार्टी का गठन मार्च, 1923 में सी.आर.दास और मोतीलाल नेहरु ने किया।
- सी.आर.दास इसके अध्यक्ष तथा मोतीलाल नेहरु इसके महासचिव थे।
कौन देशबंधु के नाम से प्रसिद्ध है - चितरंजन दास U.P.P.C.S. (Mains) 2006
- चितरंजन दास को देशबंधु के नाम से जाना जाता था।
- देशबंधु का तात्पर्य है - The Friend of Nation. चितरंजन दास इंग्लैंड से वकालत की पढ़ाई करने के बाद स्वदेश आकर बैरिस्टर हो गए तथा वकील के रुप में इनकी सबसे बड़ी सफलता अलीपुर बमकांड केस में अरबिंद घोष का बचाव करना था।
- उन्होंने मोतीलाल नेहरु के साथ मिलकर स्वराज पार्टी की स्थापना की थी।
स्वराज आम जनता के लिए होना चाहिए केवल वर्गों के लिए नहीं, के प्रसिद्ध सूत्र की घोषणा की - सी.आर.दास B.P.S.C. (Pre) 1997
- देशबंधु चितरंजन दास (सी.आर.दास) ने कहा था - स्वराज आम जनता के लिए होना चाहिए केवल वर्गों के लिए नहीं।
कांग्रेसी नेताओं मांटेग्यू - चेम्सफोर्ड रिपोर्ट की निंदा करने पर कई नरमपंथियों ने पार्टी को छोड़कर कौन सी पार्टी का गठन किया - इंडियन लिबरल फेडरेशन I.A.S. (Pre) 2003
- मांटेग्यू घोषणा के संबंध में कांग्रेस में मतभिन्नता के फलस्वरुप अंततः कांग्रेस में पुनः विघटन हुआ।
- सूरत विघटन (1907) के समय उदारवादियों ने उग्रवादियों को कांग्रेस से निष्कासित कर दिया था पर इस बार उदारवादियों ने ही कांग्रेस को छोड़ दिया।
- सुरेंद्रनाथ बनर्जी के नेतृत्व में कांग्रेस के उदारवादी एवं नरमपंथी नेताओं ने मांटेग्यू - चेम्सफोर्ड सुधारों का स्वागत किया तथा कांग्रेस से अलग होकर इंडियन लिबरल फेडरेशन (अखिल भारतीय उदारवादी संघ) की स्थापना की।
किन लोगों ने 16 दिसंबर, 1922 को इंडिपेंडेंट पार्टी बनाने का निर्णय लिया था - मदन मोहन मालवीय और मोतीलाल नेहरु U.P.P.C.S. (Mains) 2006
- 16 दिसंबर, 1922 को इंडिपेंडेंट पार्टी बनाने का निर्णय मदन मोहन मालवीय तथा मोतीलाल नेहरु ने लिया था।
- मदन मोहन मालवीय हिंदू महासभा के संस्थापक सदस्य थे।
- इन्होंने 1916 ई. में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना की।
- मोतीलाल नेहरु ने सी.आर.दास के साथ मिलकर स्वराज पार्टी की भी स्थापना की।
वे राष्ट्रीय नेता कौन थे जो 1925 में सेंट्रल लेजिस्लेटिव एसेंबली के अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे - विट्ठलभाई पटेल U.P.P.C.S. (Pre) 2012
सेंट्रल लेजिस्लेटिव एसेंबली का प्रथम भारतीय अध्यक्ष (स्पीकर) कौन था - विट्ठलभाई जे. पेटल U.D.A./L.D.A. (Pre) 2007
- सेंट्रल लेजिस्लेटिव एसेंबली के प्रथम भारतीय अध्यक्ष (स्पीकर) विट्ठलभाई जे. पटेल थे, जो 1925 में इसके अध्यक्ष बने।
- ये स्वराज पार्टी के सहसंस्थापक थे।
अगस्त, 1925 में सेंट्रल लेजिस्लेटिव एसेंबली का अध्यक्ष कौन था - विट्ठलभाई पटेल U.P.R.O./A.R.O. (Pre) 2016
- अगस्त, 1925 में सेंट्रल लेजिस्लेटिव एसेंबली के अध्यक्ष विट्ठलभाई पटेल थे।
- ये सरदार वल्लभभाई पटेल के बड़े भाई थे।
साइमन कमीशन (1927)
साइमन कमीशन भारत किस वर्ष आया - 1928 U.P.P.C.S. (Pre) 1996
- 1919 ई. के मांटेग्यू - चेम्सफोर्ड एक्ट में 10 वर्ष पर इसकी समीक्षा हेतु एक संवैधानिक आयोग के गठन का प्रावधान था।
- आयोग को यह देखना था कि यह अधिनियम शासन की दिशा में कहां तक प्रगति करने की स्थिति में है।
- लेकिन ब्रिटेन की कंजरवेटिव सरकार ने इसकी समीक्षा हेतु दो वर्ष पूर्व ही नवंबर, 1927 में साइमन कमीशन की नियुक्ति कर दी।
- जॉन साइमन की अध्यक्षता में गठित इस आयोग में कुल 7 सदस्य थे।
- क्योंकि इसके सभी सदस्य अंग्रेज थे तथा कोई भी भारतीय इसका सदस्य नहीं था, इसलिए भारतीयों ने इसे श्वेत कमीशन कहकर इसका बहिष्कार एवं विरोध किया।
- साइमन कमीशन 3 फरवरी, 1928 को बंबई पहुंचा।
साइमन कमीशन का कौन एक सदस्य उदारवादी दल का था - सर जॉन साइमन U.P.P.C.S. (Mains) 2013
- साइमन कमीशन के अध्यक्ष सर जॉन साइमन उदारवादी दल के सदस्य थे जबकि भारत की स्वतंत्रता (1947) के समय ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली इस कमीशन में श्रमिक दल के सदस्य के रुप में शामिल थे।
भारतीयों ने साइमन कमीशन का बहिष्कार किया था क्योंकि - इसका कोई सदस्य भारतीय नहीं था U.P.P.C.S. (Pre) 2004/U.P.P.C.S. (Mains) 2003/I.A.S. (Pre) 1998
किसके सुझावों पर भारतीयों को साइमन कमीशन से बाहर रखा गया - लॉर्ड इरविन U.P. Lower Sub (Pre) 2013
- लॉर्ड इरविन के सुझावों पर भारतीयों को साइमन कमीशन से बाहर रखा गया था।
- साइमन कमीशन वर्ष 1928 में भारत पहुंचा था।
- इसके विरुद्ध भारत में व्यापक विरोध - प्रदर्शन हुए थे।
- (इसमें कोई सदस्य भारतीय न होने के कारण)
लाला लाजपत राय घायल हुए थे - साइमन कमीशन के विरोध में हुए लाठी चार्ज में U.P.P.C.S. (Pre) 1993/ U.P.P.C.S. (Spl) (Pre) 2004
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने दिसंबर, 1927 में मद्रास में हुए अपने अधिवेशन में साइमन कमीशन का विरोध करने का निर्णय किया।
- 3 फरवरी, 1928 को साइमन कमीशन बंबई पहुंचा और उस दिन देशव्यापी हड़ताल का आयोजन हुआ।
- कमीशन जहां गया, वहां पूर्ण हड़ताल रखी गई तथा साइमन कमीशन, वापस जाओ के नारे के साथ जुलूस निकाले गए।
- लाहौर में साइमन कमीशन विरोधी जुलूस का नेतृत्व करते समय पुलिस के लाठी चार्ज में लाला लाजपत राय गंभीर रुप से घायल हो गए।
- पुलिस द्वारा की गई इस बर्बरतापूर्वक पिटाई के कारण ही लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गई।
- मरने से पूर्व उन्होंने कहा था - मेरे ऊपर किए गए लाठियों का एक - एक प्रहार ब्रिटिश सरकार के ताबूत की आखिरी कील साबित होगा।
साइमन आयोग नियुक्त किया गया था - 1927 में P.C.S. (Mains) 2002
पंजाब केसरी की उपाधि किसको दी गई थी - लाला लाजपत राय U.D.A./L.D.A. (Pre) 2007
- लाला लाजपत राय (1865 - 1928) पंजाब के प्रमुख राजनीतिक नेता थे जिन्होंने ब्रिटिश राज के विरुद्ध स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया था।
- उन्हें पंजाब केसरी की उपाधि दी गई थी।
नेहरु रिपोर्ट तैयार की थी - एम.एल.नेहरु ने U.D.A./L.D.A. (Pre) 2007
- साइमन कमीशन (1927) के प्रत्युत्तर में नेहरु रिपोर्ट (1928) तैयार की गई थी, जिसमें भारत के नए डोमिनियन संविधान का खाका था।
- इसे तैयार करने वाली सर्वदलीय समिति के अध्यक्ष मोतीलाल नेहरु थे।
- जवाहर लाल नेहरु इसके सचिव थे।
- दो मुस्लिमों सहित कुल 9 अन्य लोग इस समिति के सदस्य थे।
कौन वर्ष 1928 में इंडिपेंडेंस फॉर इंडिया लीग के गठन से संबद्ध थे - जवाहर लाल & सुभाषचंद्र बोस U.P. Lower Sub. (Spl) (Pre) 2008
- वर्ष 1928 में इंडिपेंडेस फॉर इंडिया लीग का गठन जवाहरलाल नेहरु तथा सुभाषचंद्र बोस ने मिलकर किया था।
- इस लीग का उद्देश्य डोमिनियन स्टेटस से आगे पूर्ण स्वतंत्रता की मांग को मुखर करना था।
- इंडिपेंडेंस लीग ने ब्रिटिश राज के विरुद्ध प्रगतिशील शक्तियों को संगठित करने में महत्वपूर्ण कार्य किया।
नेहरु रिपोर्ट............ की अध्यक्षता में एक कमेटी द्वारा तैयार किया गया था और इसका विषय................ था - मोतीलाल नेहरु, भारत में संवैधानिक व्यवस्थाएं B.P.S.C. (Pre) 2015
- साइमन आयोग को नियुक्त करने वाले अनुदार पंथी राज्य सचिव लॉर्ड बिरकेनहेड के अनुसार, भारतीय लोग संवैधानिक सुधार के लिए ठोस प्रस्ताव बनाने में असमर्थ थे।
- उन्होंने कहा कि भारतीय ऐसा संविधान बनाने में असमर्थ हैं जिसको सभी भारतीयों का व्यापक राजनीतिक समर्थन प्राप्त हो।
- इस चुनौती को भारतीयों द्वारा स्वीकार किया गया और एक योजना को अंतिम रुप देने के लिए फरवरी, मई और अगस्त, 1928 में सर्वदलीय अधिवेशन आयोजित किए गए।
- मोतीलाल नेहरु के नाम पर नेहरु रिपोर्ट नाम से बाद में जाना गया।
- मोतीलाल नेहरु ही इस रिपोर्ट के लेखक थे।
- इसमें सांप्रदायिक आधार पर अलग निर्वाचन मंडल की मांग को अस्वीकार किया गया था।
- इस रिपोर्ट में डोमिनियन स्टेट्स की मांग की गई थी।
- इसके अतिरिक्त अन्य सिफारिश की गई थी जैसे - सब वयस्कों के लिए मताधिकार, महिलाओं के लिए समान अधिकार, यूनियन (संगठन) बनाने की स्वतंत्रता और धर्म का हर प्रकार से राज्य से पृथक्करण।
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के काल में नेहरु रिपोर्ट में किस - किस की अनुशंसा की गई थी - 1. अल्पसंख्यकों हेतु आरक्षित स्थानों के लिए संयुक्त निर्वाचन - क्षेत्र 2. संविधान में भारतीयों के लिए मौलिक अधिकारों का प्रावधान I.A.S. (Pre) 2011
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